तेज़ बारिश हो रही थी। अस्पताल की खिड़कियों पर बूंदें पड़ रही थीं, जैसे किसी अनजाने खतरे की दस्तक हो। मुंबई का यह नामी "सिटी केयर हॉस्पिटल", जहाँ आज तक न जाने कितनी ज़िंदगियाँ बचाई गई थीं, आज यहाँ की हवा में एक अलग ही तनाव था।
अस्पताल की खिड़कियों से टकराती बूंदें ऑपरेशन थिएटर की ठहरी हुई हवा को और भारी बना रही थीं। डॉ. अनाया शर्मा ओटी (ऑपरेशन थिएटर) में खड़ी थी।
मॉनिटर पर टिकी अनाया की आँखें धीरे-धीरे मद्धम होती बीप... बीप... की आवाज़ सुन रही थीं।
ओटी की सफेद रोशनी में सबकुछ साफ था, लेकिन अनाया के अंदर घना अंधेरा था।
यह उसकी पहली बड़ी सर्जरी थी। किताबों में पढ़ी गई हर चीज़ दिमाग के किसी कोने में बिखरी पड़ी थी, लेकिन आज, यहाँ, इस ऑपरेशन टेबल पर, यह सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं था। यह किसी की ज़िंदगी थी।
"ब्लड प्रेशर तेजी से गिर रहा है!" नर्स की आवाज़ घबराई हुई थी।
सीनियर डॉक्टर ने सख्त लहजे में कहा, "अनाया, हमें जल्दी करनी होगी! वक्त बहुत कम है!"
ऑपरेशन टेबल पर पड़ा राघव मेहरा खून से लथपथ था। कार एक्सीडेंट में उसे गंभीर चोटें आई थीं, खासकर उसकी छाती पर। पसलियों के नीचे से लगातार खून बह रहा था।
अनाया ने कांपते हाथों से स्केलपेल उठाया।
"इंस्ट्रूमेंट पास करो," उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन हाथ तेज़ी से काम करने की कोशिश कर रहे थे।
जैसे ही अनाया ने चीरा लगाया, अचानक खून का फव्वारा सा निकला। "ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है!" नर्स चिल्लाई।
अनाया का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसके कानों में प्रोफेसर की आवाज़ गूंजने लगी, "अगर तुम ऑपरेशन टेबल पर घबरा गए, तो तुम डॉक्टर कहलाने के लायक नहीं हो!"
"स्पंज दो!" उसने खुद को संभालते हुए कहा। लेकिन उसकी आवाज़ में घबराहट थी।
सीनियर डॉक्टर ने आगे बढ़कर स्थिति को संभाला। "रक्तस्राव रोकने का प्रयास करो! जल्दी!"
बीप... बीप... बीप… मॉनिटर की आवाज़ और धीमी होने लगी।
"हार्ट रेट गिर रहा है!" नर्स ने घबराकर कहा।
सीनियर डॉक्टर ने डिफाइब्रिलेटर की ओर इशारा किया। "शॉक दो!"
पहली बार, कोई हलचल नहीं।
दूसरी बार, अब भी कुछ नहीं।
राघव की धड़कन थम रही थी।
"डॉ. अनाया, कुछ करो!" अनाया ने गहरी सांस ली। अब यह सिर्फ एक सर्जरी नहीं थी, यह उसके अस्तित्व की परीक्षा थी।
उसने डिफाइब्रिलेटर के हैंडल पकड़े, आँखें बंद कीं, और अपने दिल को मजबूत किया।
"क्लियर!"
एक तेज़ करंट का झटका राघव के शरीर में दौड़ा। लेकिन... मॉनिटर सीधी लाइन दिखा रहा था। सन्नाटा छा गया।
"टाइम ऑफ डेथ: रात 11:47," सीनियर डॉक्टर ने धीमे स्वर में कहा।
अनाया के हाथ से औजार गिर पड़ा। उसकी आँखें एकदम सुन्न हो गईं। ये कैसे हो सकता था? उसने हर संभव कोशिश की थी!
ओटी का दरवाजा खुला। बाहर गलियारे में खड़े राघव की माँ और राघव का बड़ा भाई उम्मीद से उनकी ओर देख रहे थे।
लेकिन जब डॉक्टर ने बस "सॉरी" कहा, तो जैसे पूरी दुनिया कांप उठी।
बारिश अब भी हो रही थी, लेकिन उसके शोर में भी आदर्श मेहरा का गुस्सा दब नहीं सकता था।
राघव की माँ वही पर बैठकर रोने लगती है। राघव अब इस दुनिया में नहीं था। उसकी मौत की खबर सुनते ही आदर्श का खून खौल उठा था।
लेकिन जब उसे यह पता चला कि यह अनाया की पहली सर्जरी थी, तो उसका गुस्सा अब हद से बाहर था।
"आदर्श मेहरा!" एक शक्तिशाली बिजनेसमैन। एक भाई, जिसने अपने छोटे भाई को खो दिया था।
एक आदमी, जिसने उसी पल फैसला कर लिया था, कि वो अनाया शर्मा की ज़िंदगी को नर्क बना देगा!
"पहली सर्जरी?" उसने सीनियर डॉक्टर से धीमी लेकिन ठंडी आवाज़ में पूछा था।
डॉक्टर ने बस सिर झुका लिया। आदर्श के होंठों पर एक हल्की हंसी आई, एक ऐसी हंसी, जो किसी आने वाले तूफान की निशानी होती है।
"मेरे भाई की जान एक नौसिखिए डॉक्टर के हाथ में थी?"
वह तेजी से मुड़ा और गलियारे में खड़ी सफेद कोट पहने डॉ. अनाया शर्मा की ओर बढ़ा।
वह वहीं खड़ी थी, चेहरा उतरा हुआ, आँखों में दुख और थकान का अजीब सा मेल। लेकिन आदर्श को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था।
"तुम!" उसकी आवाज़ गरजी। अनाया ने चौंककर सिर उठाया और आदर्श को देखा। वह आदमी बहुत गुस्से में लग रहा था।
"जी?" उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन आदर्श का गुस्सा इसे सुनने के लिए बहुत तेज़ था। "ये तुम्हारी पहली सर्जरी थी?"
अनाया का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने जवाब नहीं दिया, लेकिन उसकी चुप्पी ही सबसे बड़ा जवाब थी।
आदर्श ने नफरत से अनाया की ओर देखा। "तो मेरे भाई की जान तुमने ली है?"
अनाया के होंठ फड़फड़ाए। "नहीं, मैंने अपनी पूरी कोशिश की थी…"
"पूरी कोशिश?" आदर्श ने ठहाका मारा, लेकिन उसमें हंसी नहीं थी, सिर्फ गुस्सा था। "मेरे भाई की मौत तुम्हारे लिए एक मेडिकल केस था, लेकिन मेरे लिए, यह मेरी दुनिया थी, जिसे तुमने खत्म कर दिया!"
"मैंने किसी को नहीं मारा!" अनाया ने कड़े शब्दों में कहा, "मैंने वही किया, जो एक डॉक्टर को करना चाहिए था। लेकिन मैं भगवान नहीं हूँ!"
आदर्श ने एक कदम आगे बढ़ाया, आदर्श की आँखों में ऐसा गुस्सा था कि अनाया ने खुद को थोड़ा पीछे कर लिया।
"तुम डॉक्टर कहलाने के लायक नहीं हो," वह फुसफुसाया। "और मैं इस बात को यहीं खत्म नहीं होने दूंगा।"
"क्या मतलब?" आदर्श के होंठों पर एक ठंडी मुस्कान आई। "मतलब ये, कि तुम्हारी ज़िंदगी अब वैसे नहीं चलेगी, जैसी चल रही थी।"
अनाया ने आदर्श की बात सुनकर एक पल के लिए साँस रोक ली।
"मैं तुम्हें तबाह कर दूंगा, डॉ. अनाया शर्मा," आदर्श की आवाज़ अब शांत थी, लेकिन उस शांति में भी एक खतरनाक आग छिपी थी। "तुमने जो किया, उसका अंजाम तुम्हें भुगतना पड़ेगा!"
यह सिर्फ पहली मुलाकात थी, लेकिन इस मुलाकात ने जंग की नींव रख दी थी।
क्या सच में अनाया ही गुनाहगार थी?
क्या आदर्श को अपनी गलती का एहसास होगा?
क्या सच्चाई सबके सामने आएगी, या फिर गलतफहमियों की दुनिया ही बनी रहेगी?